The Story Of Scam Harshad Mehta 1992
द स्टोरी ऑफ़ स्कैम हर्षद मेहता 1992
" पैसा वही है , चाहे आप इसे कमाए या इसे घोटाला करे ", यह सोचना था हर्षद मेहता का जो की एक पूर्व कुश्तीबाज प्रबंधक बॉबी हेनन ने कहा था। किसी खोटाले की साजिश करने में भी उतना ही मेहनत और आत्मसम्पर्ण लगता जितना की सही तरह से काम करके पैसा कामने में लगता है। बस दोनों में इतना फरक है की घोटाले में आप को सब्र कम करना पड़ता है और सही तरीके से कामने में सब्र की बहुत ज्यादा जरुरत होती है।
भारत के इतिहास में सबसे बड़ा स्कैम 1992 में द बिग बुल कहे जाने वाले "हर्षद मेहता " ने किया था |हर्षद मेहता का जन्म गुजरात के एक गुजराती जैन परिवार में 1954 में हुआ था। हर्षद मेहता का बचपन मुंबई में बीता और उसने अपने कॉलेज की पढाई भी मुंबई के लाला लाजपत राय कॉलेज से किया था। लोगो ने हर्षद मेहता को तब जाना जब मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में 1992 का सबसे बड़ा स्कैम हुआ।
प्रारंभिक जीवन (बचपन )
हर्षद मेहता का जन्म 29 जुलाई 1992 गुजरात के राजकोट के गुजराती जैन परिवार में हुआ था | हर्षद मेहता का पूरा नाम "हर्षद शांतिलाल मेहता" था हर्षद का बचपन मुंबई के कांदिवली मे बीता था | उसके बाद उनका परिवार रायपुर में जा कर बस गया और उनकी स्कूल की पढाई भी वही से पूरी हुई | अपनी बारहवीं की पढाई पूरी करके हर्षद फिर से मुंबई आ गया अपने आगे के पढाई को पूरा करने के लिए और उसने मुंबई के लाजपत राय कॉलेज से अपने बी कॉम की पढाई समाप्त किया | कॉलेज पूरा होने के बाद हर्षद ने सात आठ साल तक कई छोटे मोटे काम किये | लेकिन जब सपने बड़े हो तो छोटे मोटे काम को करके पूरा नहीं किया जा सकता | हर्षद ने भी अपने सपनो को पूरा करने के लिए जो बन पड़े करने को तैयार था तभी उसने उसके एक दोस्त जो शेयर मार्केट में काम करता था और उससे शेयर बाजार के कमाई के बारे में उसने सुना था | बस यही से उसने शेयर बाजार में काम करने के लिए एक कम्पनी में काम करना चालू किया | और उसने 5 से 6 साल तक काम करके शेयर मार्केट में काम करने के सारे तरीक़े अच्छे से मालूम कर लिया था और फिर उसने वहाँ से काम छोड़ कर खुद की कम्पनी और ट्रेडिंग का बिज़नेस चालू किया और यहीं से शुरुवात हुईं " द बिग बुल" कहे जाने वाले हर्षद मेहता के असल ज़िंदगी की।
करियर ऑफ़ हर्षद मेहता (बिज़नेस )
हर्षद मेहता के असल ज़िंदगी की शुरुवात तब हुई जब हर्षद ने शेयर मार्केट में अपने काम को चालू किया | हर्षद मेहता का शुरुवाती बिज़नेस को कोई सफलता नहीं मिल पा रही थी |शेयर मार्किट में हर्षद मेहता का बहुत नुकसान हो गया था जिसके कारण उनके परिवार की हालत काफी ख़राब हो गई थी जिसके चलते उनके कर्ज़े को भरने के लिए उनके पिता के पुरने प्रॉपर्टी तथा उनके माता के खानदानी जेवर भी बेचने पड़े थे | इसी कारण उनके पिता को दिल का दौरा पड़ने के वजह से मौत भी हो गयी थी | लेकिन हर्षद मेहता का दिल अभी भी शेयर मार्केट में ही था | उसने फिर से 1984 में अपनी नई कम्पनी ग्रोमोर नाम से सुरु किया | देखते ही देखते वह कम्पनी को इतनी ऊंचाई तक ले गया की लोग उसे शेयर बाजार का अमिताभ बच्चन भी कहने लगे थे | हर्षद मेहता इतना बड़ा नाम बन गया था की वह उसके एक इशारे से शेयर मार्केट में कुछ भी करा सकता था जब चाहे किसी भी शेयर के रेट को बढ़ना घटना उसके दाये हाथ का खेल था | उसने शेयर मार्किट में नाम के साथ साथ पैसा और इज्जत भी खूब कमाया | वह खुद भी खूब काम रहा था और उसके साथी भी शेयर बाजार में अपने पैर जमा चुके थे | जिसके कारण वह किसी भी कम्पनी के शेयर का भाव बहुत अधिक ऊंचाई तक लेके जाता था और कई कम्पनी के शेयर तो आसमान के भाव छू रहे थे | उसने " ऐ सी सी (ACC ) " के शेयर के रेट को रु 200 से बढ़ाकर रु 9000 तक कर दिया था | अब हर्षद मेहता नाम नहीं ब्रांड बन चूका था जिसका कोई शेयर मार्केट में सामना नहीं कर सकता था | हर्षद मेहता ने अपने सारे सपने और ख्वाबो को पूरा किया उसे गाड़ियों बहुत पसंद थी जिसके कारण उसने सबसे महंगी गाड़िया खरीदी थी और अपने सारे सपनो को पूरा कर रहा था | उसने 15500 स्क्वायर फ़ीट का अपना घर भी बनया था और अपनी ज़िन्दगी को किसी अभिनेता (सेलेब्रिटी ) की तरह जीने लगा था।
द स्कैम
बिग बुल कहे जाने वाले हर्षद मेहता अपने काम के चलते खूब चर्चित हो रहे थे जिसके कारण 1990 के दशक में बड़े बड़े इनवेस्टर उस उनके कम्पनी में इनवेस्ट करने लगे थे ,जिस के कारण हर्षद मेहता वो सारा पैसा ACC पे लागने लगा और एसीसी (ACC) के शेयर की कीमत रु 200 से बढ़कर रु 9000 हो गयी थी | यही से उसके नाम बड़े बड़े मैगज़ीन , न्यूज़ पेपर और कवर पेज पर छपने लगे थे | जिसके कारण हर्षद मेहता का नाम बड़े अदब से लिया जाने लगा था पर सब के मन में एक ही बात थी एक एक ब्रोकर इतना पैसा कहा से ला रहा था | इसी सवाल ने उसके समय को बदल दिया और उसे कई सारे प्रश्नों के घेरे में खड़ा कर दिया था |
पर्दाफाश
1992 में हर्षद के इस राज को टाइम्स ऑफ़ इंडिया की पत्रकार सुचेता दलाल ने इस बात से पर्दाफाश किया सुचेता का कहना था की हर्षद बैंको से पैसे लेता था और उन पैसो को स्टॉक मार्केट में लगा देता था और उन पैसो से कमाया हुये पैसों में से थोड़ा प्रॉफिट बैंको को भी देता था | लेकिन बैंको में जो पैसे होते है वह आम जनता के है और किसी के पैसों का इस्तेमाल अपने रिस्क पर करना सरकार के नियमों के खिलफा है और हर्षद मेहता यही कर रहा था वह लोगो के पैसों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने लगा था जो की गलत था | सुचेता दलाल ने हर्षद मेहता के सारे कारनामों को पेपर में छाप दिया था और इसी के साथ हर्षद मेहता का सच सब के सामने आने लगा था जिसके कारण सारे बैंको ने अपने पैसों को वापस मांगना सुरु कर दिया था और साथ ही साथ हर्षद के ऊपर सीबीआई की जांच भी होने लगी थी जिसमें सीबीआई ने उसके सारे कारनामों का पर्दाफाश कर दिया। खुलासा होने के बाद हर्षद मेहता के ऊपर कई सारे केस हुये और कई सारे चार्ज भी लगाये गए थे | बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसे पांच साल की सजा भी सुनाई थीं।
कैसे करता था हर्षद मेहता बैंको से फ्रॉड(धोखा )
वह बैंको से फेक बी आर बना के उनसे पैसे लेता था और उन पैसो को स्टॉक मार्केट में लगा देता था और शेयर के भाव बढ़ने पर वह उन शेयर को बेच देता था इस तरह वह कम्पनी के भाव को भी बढ़ा देता था जिससे उसका भी फ़ायदा होता था और बैंक को भी उसमे से कुछ फायदा मिल जाता था। लेकिन बिना सिक्योरिटी के किसी को भी बैंक के पैसे देना कानून के खिलफ था लेकिन वह बैंको से यह काम बड़े आसानी से कर रहा था।
मृत्यु
हर्षद मेहता के ऊपर कई सारे केस चल रहे थे लेकिन उन्हें मात्र 1 केस में दोषी पाया गया था जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट ने उसे 5 साल की सजा भी सुनाई थी। मेहता ठाणे जेल में बंद था 31 दिसम्बर 2001 को देर रात उसे छाती में दर्द की शिकयत हुई जिसके बाद उसे ठाणे सिविल अस्पातल में भर्ती कराया गया जहाँ उसकी मौत हो गई।
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